रूस की सेना ने कई सालों से बंद चेर्नोबिल न्यूक्लियर पावर प्लांट पर कब्जा कर लिया है। बताया जा रहा है कि यह पावर प्लांट उत्तरी यूक्रेन के शहर चेर्नोबिल में है। 1986 में इसी चेर्नोबिल न्यूक्लियर पावर प्लांट में दुनिया की सबसे विषम परमाणु हादसा हुआ था।
चेर्नोबिल न्यूक्लियर पावर प्लांट में हादसे के बाद लाखों लोगों को पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ा था। इस पावर प्लांट में कितने लोगों की मौत हुई है, अब तक पता नहीं चल पाया है। चेर्नोबिल और प्रिपयात दोनों ही शहरों में लाखों लोग इस आपदा से प्रभावित हुए थे।
चेर्नोबिल शहर बेलारूस से लगती यूक्रेन सीमा से महज 10 मील ही दूर है। बेलारूस रूस का एक प्रमुख सहयोगी है और विशेषज्ञों का मानना है कि रूस ने चेर्नोबिल पर इसलिए कब्जा किया है ताकि यूक्रेनी सेनाओं पर आक्रमण का यह सबसे तेज जमीनी मार्ग है। चेर्नोबिल यूक्रेन सीमा के पास स्थित है, इसलिए इस पर कब्जा करना बहुत ही आसान था।
इस मामले में अमेरिकी सेना के पूर्व प्रमुख जैक कीन का कहना है कि चेर्नोबिल का अब कोई महत्व नहीं है। लेकिन इसकी लोकेशन यूक्रेन की सरकार को गिराने के लिए रूस के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि चेर्नोबिल यूक्रेन के चार महत्वपूर्ण रास्तों में से एक है जिसका इस्तेमाल रूसी सेना ने यूक्रेन पर कब्जे के लिए किया है।
चेर्नोबिल यूक्रेन की राजधानी कीव से मात्र 130 किलोमीटर दूर है। ऐसे में रूसी सेनाओं का चेर्नोबिल पर कब्जा होना, रूस को एक रणनीतिक बढ़त देता है। इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलंस्की ने आशंका जताई है कि रूस का चेर्नोबिल पर कब्जा होना एक बार फिर 1986 जैसा परमाणु हादसा को आमंत्रित कर सकता है।
यू्क्रेन की परमाणु संस्था ने कहा है कि रूस के हमले के बाद बंद पड़े चेर्नोबिल पावर प्लांट में रेडिएशन का स्तर बढ़ गया है। चेर्नोबिल पावर प्लांट में करीब 22 हजार बोरी परमाणु कचरा रखा है। इस परमाणु कचरे से रेडियो एक्टिव गामा किरणें निकलती रहती हैं।
जानकारों का मानना है कि अगर यहां पर एक भी बम विस्फोट हुआ तो रेडिएशन चारों ओर फैल सकता है। इस रेडिएशन को फिर संभालना मुश्किल हो जाएगा। 1986 में हादसे के बाद सोवियत सेना ने हेलीकॉप्टर से भर-भर कर कंक्रीट बरसाए थे। हालांकि अभी भी पूरी तरह से यहां रेडिएशन खत्म नहीं हो पाया है।
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