नई दिल्ली: आद हिन्दी पत्रकारिता दिवस है। यूं तो भारत का मीडिया काफी मुखर है। आम जनता भारत में मीडिया को काफी फॉलो भी करती है। देश में प्रिंट और टीवी, दोनों ही मीडिया का लोग पढ़ते सुनते हैं। आज के दौर में सोशल मीडिया के जरिए भी मीडिया ने अच्छी जगह बनाई है। देशभर में लोग न्यूज़ हर सैगमेंट की ओर से फॉलो करते हैं।
लेकिन एक चौंकाने वाली स्टडी के मुताबिक, भारत और पाकिस्तान दोनों में ही मीडिया को आजादी एक ही जैसी है। भारत में भी मीडिया पर तमाम तरह के सवाल खड़े किये जाते हैं कि वो केवल सरकारों की ही बोली बोलता है। लेकिन सरकार की कमजोरियों पर पर्दा डालते हैं। बावजूद इसके कई मीडिया चैनल, अखबार इसके विपरीत सच्चाई दिखाने से पीछे नहीं हटते।
इसी पर पत्रकारों की एक जानी मानी संस्था रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स की प्रेस फ्रीडम इंडेक्स के मुताबिक साल 2020 में भारत और पाकिस्तान में मीडिया को आज़ादी एक जैसी ही देखी गई है।
रिसर्च के मुताबिक 173 देशों की मीडिया पर ये स्टडी की गई। इस लिस्ट में भारत 142वें जबकि पाकिस्तान 145वें नंबर पर है।
इससे तो यही सवाल उठता है कि क्या ये दोनों पड़ोसी मुल्क अपने पत्रकारों के साथ एक जैसा ही सुलूक करते हैं?
भारत और पाकिस्तान में तीन दर्जों का फर्क केवल इसलिए है कि कुछ वक्त पहले तक भारत में पत्रकारों को स्थानिय गुटों और गुंडों के हाथों में था। लेकिन पिछले कुछ सालों से ये कमान सत्तारूढ़ प्राटियों ने संभाली हुई है। कुछ समय तक तो एक पत्रकार जोरो से काम करता है लेकिन फिर उसे समझ में आ जाता है कि पानी में रहकर मगरमच्छ से बैर कैसा।
ऐसा ही हाल पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान का भी है। यहां भी मीडिया को बोलने की कोई आजादी नहीं है। यहां का मीडिया भी सरकार के खिलाफ नहीं बोल पाता।
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