Vijaya Ekadashi 2021: पूजा की इस विधि को अपनाने से सभी मनोकामनाएं होगी पूरी, जानिए शुभ व अशुभ मुहूर्त
नई दिल्ली: सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। यूं तो सालभर में कई एकादशी व्रत है और सबका अपना-अपना महत्व है। 9 मार्च को विजय एकादशी है। विजया एकादशी हर वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी मनाई जाती है। यह एकादशी महाशिवरात्रि से दो दिन पहले आती है। सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार एकादशी का व्रत रखने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है और कष्टों से मुक्ति मिलती है। विजया एकादशी के दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु की पूजा अर्चना पूरे विधि-विधान से की जाती है।
विजया एकादशी व्रत शुभ मुहूर्त-
एकादशी तिथि आरंभ- 08 मार्च 2021 दिन सोमवार दोपहर 03 बजकर 44 मिनट से
एकादशी तिथि समाप्त- 09 मार्च 2021 दिन मंगलवार दोपहर 03 बजकर 02 मिनट पर
विजया एकादशी पारणा मुहूर्त- 10 मार्च को 06:37:14 से 08:59:03 तक।
अवधि- 2 घंटे 21 मिनट
एकादशी के दिन सबसे पहले सुबह उठकर स्नान करना शुभ माना जाता है। इस दिन मंदिर में पूजा करने से पहले एक वेदी बनाकर 7 अनाज (उड़द, मूंग, गेहूं, चना, जौ, चावल और बाजरा) रखें। पूजा की वेदी पर कलश स्थापना करें और आम या अशोक के 5 पत्ते लगाएं। वेदी पर भगवान विष्णु की प्राण प्रतिष्ठा करें या मूर्ति स्थापित करें। इसके बाद भगवान विष्णु को पीले फूल, ऋतुफल और तुलसी दल समर्पित करें और विष्णुजी की आरती उतारें। अगले दिन सुबह ब्राह्मण भोज कराएं और दान-दक्षिणा देकर विदा करें, इसके बाद खुद भोजन ग्रहण करें। ऐसा करने से भगवान विषणु प्रसन्न होते हैं और मन चाहा फल प्रदान करते हैं।
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