प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 11 बजे अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम- ‘मन की बात’ के जरिए देशवासियों को संबोधित किया। अपने 74वें संबोधन में उन्होंने कई मुद्दों पर बात की। इसी दौरान पीएम मोदी ने खेलों का जिक्र भी किया।
उन्होंने कहा, 'हमने देखा है कि जिन खेलों में कमेंट्री समृद्ध है, उनका प्रचार-प्रसार बहुत तेजी से होता है| हमारे यहां भी बहुत से खेल हैं लेकिन उनमें कमेंट्री कल्चर नहीं आया है और इस वजह से वो लुप्त होने की स्थिति में हैं।'
‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में हुए एक क्रिकेट टूर्नामेंट का जिक्र किया। उन्होंने कहा, 'संस्कृत कॉलेज में एक क्रिकेट टूर्नामेंट खेला गया। इसमें कमेंट्री भी संस्कृत में हुई। इस टूर्नामेंट में खिलाड़ी और कॉमेंटेटर पारंपरिक परिधान में नजर आए।'
उन्होंने कमेंट्री के फायदे गिनाते हुए कहा, 'यदि आपको एनर्जी, एक्ससाइटमेंट, सस्पेंस सब कुछ एक साथ चाहिए तो आपको खेलों की कमेंट्री सुननी चाहिए। टी.वी. आने से बहुत पहले, स्पोर्ट्स कमेंट्री ही वो माध्यम थी, जिसके जरिए क्रिकेट और हॉकी जैसे खेलों का रोमांच देशभर के लोग महसूस करते थे।'
पीएम ने खेल मंत्रालय से एक खास मांग भी की। उन्होंने कहा, 'हमारे यहां बहुत से भारतीय खेल हैं लेकिन उनमें कमेंट्री कल्चर नहीं आया है और इस वजह से वो लुप्त होने की स्थिति में हैं। मेरे मन में एक विचार है- क्यों न, अलग-अलग स्पोर्ट्स और विशेषकर भारतीय खेलों की अच्छी कमेंट्री अधिक से अधिक भाषाओं में हो, हमें इसे प्रोत्साहित करने के बारे में जरूर सोचना चाहिए। मैं खेल मंत्रालय और निजी संस्थानों से भारतीय खेलों की अधिक से अधिक भाषाओं में अच्छी कमेंट्री करने पर विचार करने का आग्रह करता हूं।'
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