नई दिल्ली: 2020 में कोरोना वायरस महामारी से वैश्विक अर्थव्यवस्ता पर काफी प्रभाव पड़ा है। इतना ही नहीं दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ-साथ भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी काफी ज्यादा असर पड़ा है। इसी के साथ आम लोगों और व्यापार पर कोरोना महामारी गहरा असर देखने को मिला है। सरकार ने किस क्षेत्र को क्या राहत दी है, इसकी पूरी जानकारी हम आपको देंगे।
ऐसे में रेलवे, टूरिज्म, रियल एस्टेट, ऑटो, एजुकेशन, आदि सभी सेक्टर्स 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए जाने वाले बजट से आस लगाए बैठे हैं। इस बार का बजट इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि मौजूदा समय में भारत की अर्थव्यवस्था पर सुस्ती छाई ही है और इसलिए हर कोई इस बात का इंतजार कर रहा है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पिटारे से किसको क्या सौगात मिलेगी।
आइए जानते हैं कि विभिन्न क्षेत्रों की बजट 2021 से क्या मांगें हैं।
#Education Field:- एक खास पहलू जिसे केंद्रीय बजट 2021 में देखा जा रहा है और वो है निजी क्षेत्र की संस्थाओं को दी जाने वाली वित्तीय सहायता, जिसमें कम लागत और शून्य-लागत कर्ज शामिल है। वहीं सरकार को राहत कोष स्थापित करने के लिए बजट में आवंटन के बार में सोचना चाहिए, जिससे कोरोना काल में मुश्किलों को झेलने वाले अफोर्डेबल प्राइवेट स्कूलों को आसान क्रेडिट या सैलरी फंड उपलब्ध हो सके। सरकार को सभी सरकारी और निजी स्कूल में डाटा कनेक्शन उपलब्ध कराना चाहिए, जिससे स्कूलों में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी की वजह से आगे चलकर छात्रों की पढ़ाई का नुकसान नहीं हो।
#Real Estate Sector:- आने वाले बजट में कर छूट का दायरा बढ़ाने की मांग की गई है। आवास ऋण के भुगतान पर आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत मिलने वाली कर छूट की सीमा भी बढ़ाई जानी चाहिए। रियल एस्टेट निवेश न्यास (रीट) में निवेश को बढ़ावा देने के लिए कर प्रोत्साहन की भी सिफारिश की गई है।
इस बार बजट में यह मांग भी की गई है कि 30 लाख रुपये या उससे कम के किफायती घरों पर उसकी कीमत का 90 फीसदी तक होम लोन दिया जाए। होम लोन के ब्याज पर आयकर छूट की सालाना 2 लाख की सीमा को पूरी तरह खत्म किया जाए या फिर इसे नए स्तर पर ले जाया जाए।
# Newspaper Publishers Demand:- समाचार पत्र प्रकाशकों ने सरकार से न्यूजप्रिंट पर लागू 5 फीसदी का आयात शुल्क हटाने की मांग की है। तो वहीं, इंडियन न्यूजपेपर सोसायटी (INS) ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को बजट से पहले सौंपे ज्ञापन में अखबारी कागज के आयात पर सीमा शुल्क कटौती, उद्योग को प्रोत्साहन पैकेज या कम से कम 50 फीसदी बढ़े शुल्क के साथ विज्ञापन जारी करने का आग्रह किया है।
#Tourism & Hospitality Sector:- भारतीय पर्यटन और आतिथ्य के संघों के महासंघ (FAITH) ने देशभर में पर्यटन को उद्योग का दर्जा देने के लिए कहा है। महासंघ के कार्यवाहक CEO आशीष गुप्ता ने कहा था कि ' FAITH के सदस्य सामूहिक रूप से सरकार के विभिन्न सदस्यों के संपर्क में हैं और उन्हें आम बजट में उचित राहत मिलने की उम्मीद है।' उन्होंने कहा कि ' FAITH ने पर्यटन क्षेत्र के लिए कई तरह की कर राहत की सिफारिश भी की है, जिसमें निर्यात आय को कर मुक्त बनाने और और भारत में यात्रा करने पर आयकर छूट दिए जाने की बात शामिल है।'
#Msmae:- इस बजट में Msmae (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) सेक्टर को राहत मिलने की संभावना है। कारोबार ग्रोथ को बढ़ावा और Msmae के प्रोत्साहन के लिए व्यावसायिक सेवाओं पर GST दर 5 फीसदी तक घटाया जाना चाहिए, जो इस समय 18 फीसदी है। इसी के साथ बजट में केंद्र सरकार Msmae को NPA से जुड़े नियमों में भी राहत दे सकती है। NPA क्लासीफिकेशन पीरियड को Msmae के लिए 90 दिन से 120 या 180 दिन तक बढ़ाया जा सकता है।
#Auto Sector:- ऑटो सेक्टर GST में कटौती की मांग कर रहे हैं। कोरोना के बाद ज्यादातर लोगों ने पर्सनल व्हीकल को रखना शुरू किया है, जिसके चलते पहली बार गाड़ी खरीदने वालों की संख्या में काफी तेजी आई है। वर्तमान में व्हीकल पर लगभग 28 फीसदी का GST लगता है। ऑटो इंडस्ट्री की मांग है कि अगर इसे घटाकर 18 फीसदी कर दिया जाता है तो मांग में जबरदस्त तेजी आएगी।
इस बार ट्रक और बस जैसे 15 साल से पुराने वाहनों को सड़क से हटाने का प्रस्ताव रखा गया है। ऐसे में माना जा रहा है कि इस बजट में सरकार व्हीकल स्क्रैप पॉलिसी लेकर आएगी। अगर इस दिशा में बजट में फैसला लिया जाता है तो इस सेक्टर में जान आ जाएगी।
#Luxury Car Companies:- लग्जरी कार कंपनियों मर्सिडीज-बेंज, ऑडी और लैम्बोर्गिनी को उम्मीद है कि सरकार आने वाले आम बजट में वाहनों पर करों में कटौती करेगी। इन कंपनियों का कहना है कि 'ऊंचे कराधान की वजह से प्रीमियम कारों का बाजार आगे नहीं बढ़ पा रहा है।'
लैम्बोर्गिनी इंडिया के प्रमुख शरद अग्रवाल ने कहा कि 'सुपर लग्जरी खंड को सरकार से निरंतरता कायम रखने की उम्मीद है। हम चाहते हैं कि 2021 में यह क्षेत्र कम से कम 2019 के स्तर पर पहुंच जाए। हम अभी वृद्धि की उम्मीद नहीं कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि यह क्षेत्र 2019 का स्तर हासिल कर ले। यदि लग्जरी कारों पर कर बढ़ता है, तो इस क्षेत्र पर काफी अधिक नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।'
Railway:- रेल मंत्रालय ने अगले साल अपने पूंजीगत व्यय को 13 फीसदी तक बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। इसके साथ ही सड़कों और राजमार्ग मंत्रालय की मांग है कि परिचालन को आधुनिक बनाने और इसके आवंटन में 10 फीसदी की वृद्धि हो। रेलवे ने निजी निवेश बढ़ाने और यात्री सुरक्षा बढ़ाने के लिए वित्त मंत्रालय से ज्यादा बजटीय सहायता की मांगी है।
बताते चले कि रेल मंत्रालय ने 15 से 20 फीसदी ज्यादा मदद का प्रस्ताव भेजा है। इसी तरह, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय को निधि आवंटन में लगभग 10 फीसदी की वृद्धि करने के लिए कहा है, यह देखते हुए कि प्रमुख परियोजनाओं को एक्सप्रेसवे सहित लाइन में खड़ा किया गया है।
यह भी उम्मीद की जा रही है कि भारतीय रेलवे के लिए की जाने वाली घोषणाओं के केंद्र में देश का बुलेट ट्रेन नेटलर्क होगा। बता दें कि रेल बजट को आम बजट में ही शामिल कर दिया गया है। पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2020-21 को पेश करते हुए कहा था कि 'केंद्र सरकार मुंबई, अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना पर तेजी से काम कर रही है।'
#Senior Citizen:- वरिष्ठ नागरिकों को देशभर में दवाइयों की कीमत में 30 फीसदी की छूट की उम्मीद है। आधार कार्ड जमा करने पर वरिष्ठ नागरिकों को सस्ती दवाइयां उपलब्ध कराई जा सकती हैं। सभी पैथोलॉजी चेकअप, उपचार और ऑपरेशन के लिए भी छूट दी जानी चाहिए।
वरिष्ठ नागरिकों ने मांग की है कि "उन्हें दांतो का इलाज के लिए विशेष रूप से छूट दी जानी चाहिए, क्योंकि यह बहुत महंगा हो गया है। यहां तक कि मेडिकल प्रीमियम भी कम किया जा सकता है।' नागरिकों ने यह भी उम्मीद है कि 'अगर उनकी आय पांच लाख रुपये तक है, तो इसपर कोई रिटर्न दाखिल नहीं होना चाहिए।' तो वहीं, अगर आपकी आय 5 लाख रुपये से ज्यादा है तो आप उसके अनुसार कर लगा सकते हैं।
इसी के साथ सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम (SCSS) पर 10 फीसदी ब्याज का लाभ दिया जा सकता है। मौजूदा समय में इसके तहत 7.4 फीसदी ब्याज दिया जाता है। नागरिकों ने अपील की है कि योजना की लिमिट 15 लाख से 30 लाख रुपये तक बढ़ाई जाए।
#Pharma Sector:- फार्मा क्षेत्र को उम्मीद है कि 'आने वाले बजट में विशेष रूप से शोध एवं विकास तथा नवोन्मेषण के लिए समर्थन दिया जाएगा।' फोर्टिस हेल्थकेयर के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी CEO आशुतोष रघुवंशी ने कहा कि 'कोविड-19 महामारी की वजह से स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के लिए अधिक बजट आवंटन की जरूरत है।' रघुवंशी ने कहा कि 'यह क्षेत्र न केवल विदेशी मुद्रा आमदनी अर्जित करने बल्कि रोजगार देने की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।'
इसी के साथ इंडियन फार्मास्युटिकल अलायंस (IPA) के महासचिव सुदर्शन जैन ने कहा कि 'कुल नीति पारिस्थिति की तंत्र स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र पर जोर देने वाला और स्वास्थ्य ढांचे के निर्माण पर केंद्रित होनी चाहिए। उन्होंने कहा फार्मा उद्योग शोध एवं विकास तथा नवोन्मेषण के लिए समर्थन और प्रोत्साहन की उम्मीद कर रहा है।'
#Businessman:- केंद्र सरकार की तरफ से अगले हफ्ते पेश किया जाने वाला आम बजट में कई वस्तुओं पर सीमा शुल्क में कटौती कर सकती है जिसमें फर्नीचर का कच्चा माल, तांबा भंगार, रसायन, दूरसंचार उपकरण और रबड़ उत्पादों को शामिल किया गया हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 'पॉलिश किए गए हीरे, रबड़ के सामान, चमड़े के कपड़े, दूरसंचार उपकरण और कालीन जैसे 20 से अधिक उत्पादों पर आयात शुल्क में कटौती की जा सकती है।'
फर्नीचर बनाने में इस्तेमाल होने वाली कुछ लकड़ियों और हार्डबोर्ड आदि पर सीमा शुल्क पूरी तरह खत्म किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि 'महंगा कच्चा माल अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की कीमत प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करता है। देश से फर्नीचर का निर्यात बहुत कम (लगभग एक फीसदी) है, जबकि चीन और वियतनाम जैसे देश इस क्षेत्र के प्रमुख निर्यातक हैं।'
#E-commerce:- केंद्र सरकार बजट में में ई-वाणिज्य आयात और निर्यात के लिए थोक मंजूरी की सुविधा देने का ऐलान कर सकती है। सूत्रों ने जानकारी देते हुए कहा कि 'तेजी से बढ़ रहे ई-वाणिज्य क्षेत्र की वृद्धि को और गति प्रदान करने के लिए ऐसा किया जा सकता है। क्योंकि देश में ई-वाणिज्य क्षेत्र में कई गुना वृद्धि हुई है। इसके कारण ई-वाणिज्य मंचों के मार्फत काफी संख्या में उत्पाद देश से बाहर जा रहे हैं और यहां आ रहे हैं। अत: इस क्षेत्र में नियंत्रण व सुविधाओं के क्रियान्वयन में संतुलन बनाने की जरूरत है।'
#Agricultural Sector:- केंद्र सरकार कृषि क्षेत्र के लिए हर साल कर्ज का लक्ष्य को बढ़ाता आ रही है और इस बार भी 2021-22 के लिए लक्ष्य को बढ़ाकर करीब 19 लाख करोड़ रुपये किया जा सकता है। चालू वित्त वर्ष के लिए सरकार ने कृषि ऋण का लक्ष्य 15 लाख करोड़ रुपये रखा है।
इसको लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2020-21 का बजट पेश करते हुए कहा था कि 'कृषि क्षेत्र को कर्ज देने के मामले में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFC) और सहकारी बैंक सक्रिय रहे हैं। राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) पुनर्वित्त योजना का आगे और विस्तार किया जाएगा। वित्त वर्ष 2020-21 के लिये कृषि कर्ज का लक्ष्य 15 लाख करोड़ रुपये रखा गया है।'
#Restaurant & Food Delivery Area:- आपको बता दें कि रेस्तरां व खाद्य डिलीवरी क्षेत्र ने होम डिलीवरी पर माल एवं सेवा कर (GST) की दरें मौजूदा 18 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी करने की मांग की है। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने कहा कि '3 अरब डॉलर के इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिये GST दर को तार्किक बनाना आवश्यक है।'
उन्होंने आगे कहा कि 'भारत में ऑनलाइन फूड डिलीवरी क्षेत्र काफी तेज गति से आगे बढ़ रहा है। यह अभी 2.94 अरब डॉलर का है और 22 फीसदी की सालाना दर से बढ़ रहा है। हालांकि, कर संबंधी जटिलताओं के चलते वृद्धि की राह में अवरोध उत्पन्न हो रहे हैं।'
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