नई दिल्ली. वित्त वर्ष 2021-22 का बजट पेश करने से पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के सामने कई बड़ी चुनौतियां खड़ी हुई है। कोरोना वायरस से पहले वजह से अर्थव्यवस्था अभी भी सुस्ती के दौर से गुजर रही है। लंबे समय तक कोरोना काल में लगे लॉकडाउन की वजह से कारोबार बंद रहे, लॉकडाउन में लोगों की नौकरियां गई तो, इनकम भी कम हो गई।
ऐसे में लोग सरकार से उम्मीद कर रही है कि जिससे आर्थिक वृद्धि का पहिया तेजी से घूम सके, ज्यादा नौकरियां मिलें, लोगों की इनकम बढ़े और निवेश व मांग बढ़े। आइए जानते हैं कि देश के मिडिल क्लास की नजर इस बार किन बातों पर रहेगी।
- लॉकडाउन से लेकर अभी तक घर से काम कर रहे कर्मचारियों को घर पर ही ऑफिस जैसी व्यवस्था करने के लिए खर्च करना पड़ा है। ऐसे में इस बार नज़र रहेगी कि सरकार इस खर्च पर कुछ राहत देती है या नहीं। क्या सरकार मांग बढ़ाने के लिए कुल डिडक्शन की घोषणा करेगी?
- कोरोना महामारी के बीच सैलरी पाने वाले मिडिल क्लास को टैक्स के मोर्चे पर भी सरकार से काफी उम्मीद है। अब देखना होगा कि क्या आने वाले बजट में सरकार स्टैंडर्ड डिडक्शन की लिमिट बढ़ाने का ऐलान करती है या नही।
क्या होता स्टैंडर्ड डिडक्शन?
बता दें कि स्टैंडर्ड डिडक्शन वह रकम है, जो किसी व्यक्ति की टैक्सेबल इनकम में से घटाने के बाद टैक्स कैलकुलेट किया जाता है। इस तरह से वो इनकम घट जाती है, जिस पर टैक्स देना होता है। स्टैंडर्ड डिडक्शन को 2018-19 के बजट में मेडिकल व ट्रांसपोर्ट अलाउंस को खत्म कर लाया गया था। उस समय स्टैंडर्ड डिडक्शन की लिमिट 40,000 रुपये थी, जिसे बढ़ाकर अब 50,000 रुपये कर दिया गया है।
- इस बार होम लोन के प्रिंसिपल रिपेमेंट पर 1.5 लाख रुपये की छूट की उम्मीद की जा रही है। यह इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के दायरे से बाहर रखने की मांग की गई है। ज्यादातर मामलों में पहले 80C के तहत 1.5 लाख की लिमिट पूरी हो रही है। इस बार मांग है कि इस छूट को घर के पजेशन मिलने की तारीख से नहीं बल्कि लोन लेने की तारीख से हो।
- सेक्शन 80C के तहत लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम, होम लोन के प्रिंसिपल रिपेमेंट, एफडी, पीएफ आदि पर 1.5 लाख रुपये तक की छूट मिलती है। पिछले कुछ वक्त से बढ़ती महंगाई को देखते हुए सरकार इस लिमिट को 2.5 से 3 लाख रुपये तक बढ़ाने का ऐलान कर सकती है। इनकम टैक्स छूट की इस लिमिट के बढ़ने का मतलब होगा कि लोग टैक्स बचाने वाले इंस्ट्रूमेंट्स पर ज्यादा खर्च करेंगे।
- इस साल कोरोना महामारी ने एक बार फिर से साबित कर दिया है कि हेल्थ इंश्योरेंस प्रोडक्ट लोगों के लिए अब एक जरूरत बन चुकी है। क्योंकि अब यह कोई विकल्प नहीं रहा है। लोगों की जान बचाने में हेल्थ इंश्योरेंस की भूमिका अब बहुत अहम भूमिका निभा रहा है। कई कंपनियों ने अपने कर्मचारियों के लिए हेल्थ इंश्योरेंस अनिवार्य कर दिया है। इसे देखते हुए उम्मीद जताई जा रही है कि अब सरकार भी इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C की अधिकतम लिमिट को बढ़ाने का ऐलान करे।
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