नई दिल्ली: कृषि कानून के खिलाफ आंदोलन को एक महीने से ऊपर हो गया है। सरकार ने किसानों से बीच कर के उन्हें नए कृषि बिल को समझाने की कोशिश कई बार की लेकिन बात नहीं बन पाई। लेकिन अब दोनों के बीच सहमती बंती दिख रही है।
दरअसल, सरकार और किसानों के बीच बुधवार के छठे दौर कि बातचीत पूरे 5 घंटे तक हुई जिसमें एमएसपी खरीद प्रणाली के बेहतर क्रियान्वयन पर एक समिति गठित करने की पेशकश की इसके अलावा बिजली के बिल का मामला भी सुलझा लिया गया है और पराली जलाना भी अब जुर्म नहीं माना जाएगा।
इस वार्ता में किसान तीनों नए कृषि कानूनों को निरस्त करने की अपनी मांग पर टिके रहें। अगली बातचीत अब चार जनवरी को फिर से होगी। इस वार्ता में सरकार की तरफ से कृषि मंत्री नरेंध्र सिंघ तोमर, रेलवे, वाणिज्य और खाद्य मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य राज्य मंत्री सोमप्रकाश थे जिन्होंने विज्ञान भवन में 41 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की।
भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा “सरकार ने प्रस्तावित विद्युत संशोधन विधेयक और पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण से संबंधित अध्यादेश को क्रियान्वित न करने पर सहमत हुई है”।
केंद्र सरकार ने सितंबर में नए कृषि कानून साया था। जिसपर भयंकर गतिरोध हुआ और उसे दूर करने के लिए ही सरकार ने पत्र किसान यूनियनों को 30 दिसंबर को वार्ता के लिए आमंत्रित किया था। तो वहीं 'संयुक्त किसान मोर्चा' ने मंगलवार को सरकार को पत्र लिख कर तीनों विवादित कानूनों को निरस्त करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानूनी गारंटी देने की बात कही।
आपको बता दें, सरकार के मंत्री जहां एक तरफ बैठक में भोजन विराम के दौरान किसान नेताओं के साथ लंगर में शामिल हुए, तो वहीं किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी शाम के चाय विराम पर सरकार के साथ जलपान किया।
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