उत्तर प्रदेश: रायबरेली की लालगंज पुलिस अपने कारनामों की वजह से आए दिन सुर्खियों में बनी रहती है, एक बार फिर कुछ ऐसा ही हुआ, जब पुलिस कस्टडी में एक दलित युवक की पिटाई के बाद उसकी मौत हो गई।
मृतक मोहित के परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए और फिर जमकर हंगामा किया। थाने का घेराव कर सड़क जाम कर बवाल मचाया। मामला बढ़ता देख कई थानों की पुलिस फोर्स इकट्ठा हुई और फिर गुस्साई भीड़ पर ही पुलिस ने लाठियां बरहसाई। बीच सड़क पर जमकर लोगों ने उत्पात मचाया और इसके साथ ही तोड़फोड़ भी की।
पुलिस ने मृतक पर बाइक चोरी करने का आरोप लगाया और इसी के साथ मृतक को निमोनिया, सांस फूलना जैसे लक्षण थे, जो आमतौर पर कोरोनावायरस से जुड़े होते हैं। राज्य की राजधानी लखनऊ से करीब 80 किलोमीटर दूर रायबरेली के लालगंज इलाके में शुक्रवार को 19 वर्षीय मोनू उर्फ मोहित को पुलिस ने एक मोटरसाइकिल चोरी में कथित रूप से शामिल होने के संदेह के आधार पर हिरासत में लिया था। वह एससी समुदाय से था। चार अन्य लोग पहले चोरी के मामले में पकड़े गए थे। "(पुलिसकर्मियों) ने मुझे और मेरे भाई को उठाया। वे उससे पूछते रहे कि चाबी कहाँ हैं। थाने में मोहित (मोनू) की बुरी तरह से पिटाई की," 19 वर्षीय के भाई सोनू ने दावा किया।
आपको बता दें कि ये पूरा मामला 26 अगस्त की रात का है, जब रायबरेली के लालगंज पुलिस ने बेहटा कला गांव के पूरे बैजू गांव निवासी मोहित और उसके भाई सोनू को हिरासत में लिया। आरोप है कि हवालात में पुलिस ने मोहित की जमकर पिटाई की और वहीं, सोनू को 28 अगस्त को छोड़ दिया। इसी दौरान शनिवार को मोहित की तबियत बिगड़ने लगी और इलाज़ के लिए मोहित को जिला अस्पताल लाया गया और वहां उसकी मौत हो गई।
मोहित की मौत के बाद सिर्फ हंगामा ही नहीं हुआ,राजनीति भी शुरू हो गई। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने ट्वीट कर लिखा, ‘बीजेपी सरकार में दलितों शोषितों पर पुलिसिया दमन जारी है, हर रोज जंगलराज किसी न किसी को शिकार बना ही लेता है।
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