छत्तीसगढ़। शुक्रवार को ब्युरोक्रेट, राजनेता और छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी का निधन हो गया। अजीत जोगी लंबे समय से बिमार चल रहे थे। रायपुर के एक अस्पताल में इलाज के दौरान दिल का दौरा पड़ने से उनका देहांत हो गया।
एक फोन जिसने कलक्टर से नेता बना दिया
साल 1985 में वो अविभाजित मध्य प्रदेश की सबसे प्रतिष्ठित जिला पोस्टिंग में से एक इंदौर कलेक्टर की पोस्ट पर थे। एक रात अजीत जोगी के बंगले पर एक फोन आया, फोन रीसीव कर बताया गया कि कलक्टर साहब आराम कर रहे हैं।
तभी सामने से एक आवाज़ आई कि साहब को उठाईए और वो आवाज़ थी तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के निजी सचिव वी जॉर्ज की। फोन उठाने वाले शख्स ने तुरंत जोगी को सुचना दी और फिर वी जॉर्ज ने अजीत जोगी से कहा कि तुम्हारे पास 2:30 घंटे हैं, तय करो कि राजनीति में आना है या कलक्टर ही रहना है।
जॉर्ज ने कहा कि 2:30 घंटे बाद दिग्विजय सिंह लेने आएंगे, उन्हें अपना फैसला बता देना। इसके बाद दिग्विजय सिंह जोगी को लेने आए और जोगी कलक्टर से 2:30 घंटे में नेता बन गए। क्योंकि देश के प्रधानमंत्री ने खुद बुलाया था तो जल्द ही जोगी राज्यसभा पहुंच गए।
उपलब्धियां
अजीत जोगी ने अपने जीवन में काफी उपलब्धियां हासिल कीं। उन्होंने मैकेनिकल इंजिनियरिंग की, गोल्ड मेडल जीता, UPSC की परिक्षा दी और IPS में शामिल हो गए, लेकिन कुछ बड़ा करने की चाह ने उन्हें रुकने नहीं दिया। दो साल बाद उन्होंने IAS क्लीयर किया।
अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने अजीत को तोहफे में दिया छत्तीसगढ़
उस समय मध्य प्रदेश कांग्रेस में दिग्विजय सिंह के अलावा मोती लाल वोरा, अर्जून सिंह और शुक्ला बंधु जैसे बड़े नेता थे, इसके बावजूद अजीत जोगी ने पार्टी में अपने लिए एक अलग जगह बना ली। साल 2000 में अटल बिहारी वाजपेयी की NDA सरकार ने उत्तरांचल, झारखंड और छत्तीसगढ़ ये 3 नए राज्य बनाए।
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छत्तीसगढ़ अलग राज्य बनने से पहले मध्य प्रदेश का हिस्सा था और विभाजन के दौरान मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी। कांग्रेस आला कमान फूट के डर से पार्टी के किसी भी नेता को छत्तीसगढ़ का CM नहीं बनाना चाहती थी, इसलिए कहा गया कि एक आदिवासी को CM बना कर छत्तीसगढ़ की पुरानी मांग पूरी की जाय और अजीत जोगी को राज्य का मुख्यमंत्री बना दिया गया।
अजीत जोगी को CM बनाने में फट गया था दिग्गी राजा का कुर्ता
अजीत जोगी और दिग्विजय सिंह एक दूसरे के प्रतिद्वंदी हो चुके थे, लेकिन बावजूद इसके अजीत जोगी को CM बनाने की ज़िम्मेदारी दिग्गी राजा को ही सौंपी गई। दिग्विजय सिंह पहुंचे इंदिरा गांधी के करीबी और मध्य प्रदेश के पहले CM पं रविशंकर शुक्ल के बेटे विद्याचरण शुक्ल को समझाने।
विद्याचरण शुक्ल के समर्थकों ने दिग्विजय सिंह के साथ धक्का-मुक्की की जिसमें दिग्गी राजा का कुर्ता फट गया, लेकिन तब उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि राजनीति में ये सब चलता है और यही मानना था अजीत जोगी का भी। इस सोच के कारण अजीत जोगी का नाम कई विवादों में भी आया।
अजीत जोगी ने बनाई अपनी अलग पार्टी
साल 2004 में हुए एक्सीडेंट के बाद से अजीत जोगी व्हील चेयर पर थे। लगातार विवादों में नाम आने के कारण पार्टी उन्हें निलंबित करने पर विचार करने लगी, लेकिन इससे पहले ही अजीत जोगी ने अपनी अलग पार्टी बना ली।
साल 2018 के विधान सभा चुनाव में मायावती की पार्टी बसपा के साथ गठबंधन किया, लेकिन अपने दम पर CM बनने की उनकी चाह अधूरी रह गई और वो इस दुनिया को अलविदा कह गए। शनिवार को उनका पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव लाया गया, जहां उनके अंतिम दर्शन के लिए भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
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